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ऑनलाइन हिन्दी बाइबल - योना
पुस्तक का परिचय :
लेखक : योना
लिखे जाने का समय : 793 - 758 B.C
योना की पुस्तक बाइबल की भविष्यवाणियों की अन्य पुस्तकों से भिन्न है। यह एक वर्णनात्मक पुस्तक है जिसमें एक भविष्यवक्ता के जोखिम भरे कार्यों का वर्णन है जिसने परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन करने का प्रयत्न किया। परमेश्वर ने योना को निनवे नगर जाने की आज्ञा दी जो इस्राएल के खतरनाक शत्रु विशाल असुरी साम्राज्य की राजधानी था। परंतु योना परमेश्वर के संदेश के साथ वहां नहीं जाना चाहता था। क्योंकि उसे पूरा निश्चय था कि परमेश्वर उस नगर का सत्यानाश करने की अपनी चेतावनी को पूरा नहीं करेंगे कई नाटकीय घटनाओं के पश्चात अनिच्छा से योना ने परमेश्वर की आज्ञा मान ली और अंत में वह परमेश्वर से रूठ गया।.जब विनाश का उसका संदेश पूरा नहीं हुआ।
यह पुस्तक सृष्टि पर परमेश्वर के पूर्ण प्रभुत्व को चित्रित करती है। पर सबसे मुख्य बात यह है कि इसमें परमेश्वर को प्रेम और दया का परमेश्वर के रूप में चित्रित किया गया है। यहां तक कि वह अपनी प्रजा के शत्रुओं को भी दंड देने और नष्ट करने के बदले उनको क्षमा करना और उनका उद्धार करना चाहता है।